सोच और चिंता में आकाश – पाताल का अंतर है!
सोचने पर आप के विचार और कार्य परिष्कृत होते हैं,
जबकि चिंता, कार्य और क्षमता दोनों को
धीरे – धीरे नष्ट करता है!